प्रकरण - श्रद्धांजलि
शीर्षक :- श्रद्धांजलि है शत्रु मुझको घेर रहे, रिपुओं से भरा जमाना है । मुझ पर है अभिमान वतन को, साबित करके दिखाना है। प्राण भले ही चले जाए, आड़ में ना मुझे जाना है। है शत्रु मुझको घेर रहे, रिपुओ से भरा जमाना है। मां मुझको है तुम माफ़ करो, वसुधा का कर्ज चुकाना है। मां तेरा तो अभिमान हूं मैं ना, मां तेरा तो सम्मान हूं मैं ना। मां तेरा तो हूं चांद ना मैं मां, अस्त नहीं हो सकता हूं। मातृभूमि पर है मर मिटने की, कसमें मैंने खाई है। बलिदानों की श्रेणी में, अब मेरी बारी आई है। चिंता मत करना मां तुम, वापस फिर मैं आ जाऊंगा। लिपट तिरंगे में मैं तेरे, चरणों में गिर जाऊंगा। है शत्रु बड़ा गीदड़ कायर मां, छिपकर घात लगाए है । मां तेरे लाल का पौरुष देखने, एक - एक शत्रु आए हैं। मां तेरी लाज बचानी मुझको, इन बौनो को सबक सिखाना है। मिट्टी से ही जन्म लिया है, मिट्टी में मिल जाना है। है चीर फेंक दूं सबको, तूने ऐसा शेर जाना है मां। क्यूं रोकरके मुझे हराती हो, ज़रा हस कर मुझे जितादो मां। है कांप रहा शत्रु का रोआं, तेरे लाल के हाल पर। मां मृत्यु को यदि गले, लगा लूं खड़ा केजरीवाल है...